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الكهف

आयत 86

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

حَتَّىٰٓ إِذَا بَلَغَ مَغْرِبَ ٱلشَّمْسِ وَجَدَهَا تَغْرُبُ فِى عَيْنٍ حَمِئَةٍ وَوَجَدَ عِندَهَا قَوْمًا ۗ قُلْنَا يَـٰذَا ٱلْقَرْنَيْنِ إِمَّآ أَن تُعَذِّبَ وَإِمَّآ أَن تَتَّخِذَ فِيهِمْ حُسْنًا ﴿٨٦﴾

तथा वह पृथ्वी पर चलता रहा, यहाँ तक कि जब सूर्यास्त की दिशा से (आँख की दृष्टि में) पृथ्वी के अंत तक पहुँच गया, तो उसने सूर्य को देखा, मानो कि वह एक काले कीचड़ वाले गर्म जलस्रोत में ड़ूब रहा है। तथा उसने सूर्यास्त के स्थान के पास अल्लाह पर विश्वास न रखने वाली एक जाति को पाया। हमने उसे एक विकल्प के रूप में कहा : ऐ ज़ुल-क़रनैन! या तो तुम इन लोगों को क़त्ल करके या किसी अन्य चीज़ के साथ यातना दो, और या तो तुम उनके साथ अच्छा व्यवहार करो।