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الكهف

आयत 6

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

فَلَعَلَّكَ بَـٰخِعٌ نَّفْسَكَ عَلَىٰٓ ءَاثَـٰرِهِمْ إِن لَّمْ يُؤْمِنُوا۟ بِهَـٰذَا ٱلْحَدِيثِ أَسَفًا ﴿٦﴾

(ऐ रसूल!) यदि वे इस क़ुरआन पर ईमान न लाए, तो शायद आप अफ़सोस और दू:ख से खुद को नष्ट कर लेंगे। तो आप ऐसा न करें। क्योंकि उन्हें सीधे मार्ग पर लाने की ज़िम्मेदारी आपपर नहीं है। आपका काम केवल संदेश पहुँचा देना है।