तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَٱسْتَفْزِزْ مَنِ ٱسْتَطَعْتَ مِنْهُم بِصَوْتِكَ وَأَجْلِبْ عَلَيْهِم بِخَيْلِكَ وَرَجِلِكَ وَشَارِكْهُمْ فِى ٱلْأَمْوَٰلِ وَٱلْأَوْلَـٰدِ وَعِدْهُمْ ۚ وَمَا يَعِدُهُمُ ٱلشَّيْطَـٰنُ إِلَّا غُرُورًا ﴿٦٤﴾
और उनमें से जिसे भी तू अपनी पाप की ओर बुलाने वाली आवाज़ से बहका सके, बहका ले और उनपर अपने आज्ञापालन की ओर बुलाने वाली पैदल तथा सवार सेना चढ़ा ला, तथा हर शरीयत विरोधी व्यवहार को सुंदर बनाकर उनके धन में उनका साझी बन जा, और उनके बच्चों में भी उनके साथ हिस्सेदार बन जा उनका झूठा दावा करके, उन्हें व्यभिचार के द्वारा प्राप्त कर और उनके ऐसे नाम रखवाकर जो अल्लाह के अलावा की बंदगी को दर्शाने वाले हों। और उनके लिए झूठे वादे और झूठी आकांक्षाएँ सुशोभित कर। और शैतान उनसे केवल झूठे वादे करता है, जो उन्हें धोखा देने वाले होते हैं।