तफ़सीर अल-मुख़्तसर
ضَرَبَ ٱللَّهُ مَثَلًا عَبْدًا مَّمْلُوكًا لَّا يَقْدِرُ عَلَىٰ شَىْءٍ وَمَن رَّزَقْنَـٰهُ مِنَّا رِزْقًا حَسَنًا فَهُوَ يُنفِقُ مِنْهُ سِرًّا وَجَهْرًا ۖ هَلْ يَسْتَوُۥنَ ۚ ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ ۚ بَلْ أَكْثَرُهُمْ لَا يَعْلَمُونَ ﴿٧٥﴾
अल्लाह ने बहुदेववादियों के खंडन के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत किया है : एक पराधीन दास है, जिसे कोई अधिकार प्राप्त नहीं है। उसके पास खर्च करने के लिए कुछ भी नहीं है। और एक आज़ाद व्यक्ति है, जिसे हमने अपने पास से वैध धन प्रदान किया है, जिसमें वह जैसे चाहे, व्यवहार करे। चुनाँचे वह उसमें से गुप्त रूप से और खुले तौर पर जितना चाहता है, खर्च करता है। तो ये दोनों व्यक्ति बराबर नहीं हो सकते। फिर तुम उस अल्लाह को, जो मालिक है, अपने स्वामित्व की चीज़ों में जैसे चाहे व्यवहार करता है, अपनी असहाय मूर्तियों के बराबर कैसे बनाते हो?! सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जो प्रशंसा का हक़दार है। परंतु अधिकतर बहुदेववादी इस बात को नहीं जानते कि पूज्यता एकमात्र अल्लाह ही के लिए विशिष्ट है और अकेला वही पूजा किए जाने के योग्य है।