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النحل

आयत 33

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

هَلْ يَنظُرُونَ إِلَّآ أَن تَأْتِيَهُمُ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ أَوْ يَأْتِىَ أَمْرُ رَبِّكَ ۚ كَذَٰلِكَ فَعَلَ ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ وَمَا ظَلَمَهُمُ ٱللَّهُ وَلَـٰكِن كَانُوٓا۟ أَنفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ ﴿٣٣﴾

क्या ये झुठलाने वाले बहुदेववादी इस बात की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि मौत का फ़रिश्ता और उसके सहयोगी फ़रिश्ते उनकी रूह निकालने और उनके चेहरों और उनकी पीठों पर मारने के लिए उनके पास आ जाएँ, या दुनिया ही में अज़ाब के द्वारा उनका उन्मूलन करने के लिए अल्लाह का आदेश आ जाए? इसी तरह का कार्य जो मक्का के मुश्रिक (बहुदेववादी) कर रहे हैं, इनसे पहले के बहुदेववादियों ने किया था। इसलिए अल्लाह ने उन्हें नष्ट कर दिया। और अल्लाह ने उन्हें नष्ट करके उनपर अत्याचार नहीं किया, लेकिन वे स्वयं अपने ऊपर अत्याचार किया करते थे, अल्लाह के इनकार द्वारा खुद को विनाश की जगहों में उतारकर।