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النحل

आयत 25

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

لِيَحْمِلُوٓا۟ أَوْزَارَهُمْ كَامِلَةً يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ ۙ وَمِنْ أَوْزَارِ ٱلَّذِينَ يُضِلُّونَهُم بِغَيْرِ عِلْمٍ ۗ أَلَا سَآءَ مَا يَزِرُونَ ﴿٢٥﴾

ताकि उनका अंजाम यह हो कि वे बिना किसी कमी के अपने गुनाहों का बोझ उठाएँ और उन लोगों के गुनाहों का भी कुछ बोझ उठाएँ, जिन्हें उन्होंने अज्ञानता और पूर्वजों के अनुकरण में इस्लाम से भटकाया है। तो उनका अपने पापों और अपने अनुयायियों के पापों का बोझ उठाना कितना बुरा है।