तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَيَسْتَعْجِلُونَكَ بِٱلسَّيِّئَةِ قَبْلَ ٱلْحَسَنَةِ وَقَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهِمُ ٱلْمَثُلَـٰتُ ۗ وَإِنَّ رَبَّكَ لَذُو مَغْفِرَةٍ لِّلنَّاسِ عَلَىٰ ظُلْمِهِمْ ۖ وَإِنَّ رَبَّكَ لَشَدِيدُ ٱلْعِقَابِ ﴿٦﴾
(ऐ रसूल!) मुश्रिक लोग आपसे यातना जल्दी माँग रहे हैं और उसके आने में देरी की शिकायत कर रहे हैं, इससे पहले कि वे अल्लाह के द्वारा उनके लिए निर्धारित नेमतों को पूरा करें। जबकि उनसे पहले उन्हीं जैसे झुठलाने वाले समुदायों पर यातनाएँ गुज़र चुकी हैं। फिर वे उनसे सीख क्यों नहीं लेते? और (ऐ रसूल!) निःसंदेह आपका पालनहार लोगों को, उनके अत्याचार के बावजूद, नज़र अंदाज़ करने वाला है। चुनाँचे वह उन्हें अज़ाब देने में जल्दी नहीं करता, ताकि वे अल्लाह के समक्ष तौबा कर लें। और निःसंदेह वह अपने कुफ़्र पर अडिग रहने वालों को, यदि वे तौबा न करें, निश्चित रूप से सख़्त सज़ा देने वाला है।