तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَقَدْ مَكَرَ ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ فَلِلَّهِ ٱلْمَكْرُ جَمِيعًا ۖ يَعْلَمُ مَا تَكْسِبُ كُلُّ نَفْسٍ ۗ وَسَيَعْلَمُ ٱلْكُفَّـٰرُ لِمَنْ عُقْبَى ٱلدَّارِ ﴿٤٢﴾
पिछले समुदायों ने अपने नबियों के साथ छल किया, चालें चलीं और उनकी लाई हई बातों को झुठलाया। परंतु उन्होंने उनके ख़िलाफ़ उपाय (साज़िश) करके क्या कर लिया? कुछ नहीं; क्योंकि प्रभावी उपाय केवल अल्लाह का उपाय है, किसी और का नहीं। तथा वह महिमावान् (अल्लाह) ही है, जो सारी सृष्टि के सभी कर्मों को जानता है, उनमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। और उस समय इन झुठलाने वालों को पता चल जाएगा कि वे अल्लाह पर ईमान न लाने में कितने गलत थे और ईमान वाले लोग कितने सही थे। इसलिए उन्होंने जन्नत और अच्छा परिणाम प्राप्त किया।