तफ़सीर अल-मुख़्तसर
أَفَمَنْ هُوَ قَآئِمٌ عَلَىٰ كُلِّ نَفْسٍۭ بِمَا كَسَبَتْ ۗ وَجَعَلُوا۟ لِلَّهِ شُرَكَآءَ قُلْ سَمُّوهُمْ ۚ أَمْ تُنَبِّـُٔونَهُۥ بِمَا لَا يَعْلَمُ فِى ٱلْأَرْضِ أَم بِظَـٰهِرٍ مِّنَ ٱلْقَوْلِ ۗ بَلْ زُيِّنَ لِلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مَكْرُهُمْ وَصُدُّوا۟ عَنِ ٱلسَّبِيلِ ۗ وَمَن يُضْلِلِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُۥ مِنْ هَادٍ ﴿٣٣﴾
तो क्या जो सभी सृष्टि की जीविका के संरक्षण का ज़िम्मेदार, हर प्राणी के कार्यों की निगरानी करने वाला है, चुनाँचे वह उसे उसके कार्यों का बदला देगा, वह उपासना किए जाने के अधिक योग्य है, या ये मूर्तियाँ जिन्हें इस बात का कोई अधिकार नहीं कि उनकी पूजा की जाए? हालाँकि काफ़िरों ने उन्हें अन्यायपूर्वक और झूठमूठ अल्लाह का साझी बना लिया है। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें : तुम हमें उन साझियों के नाम बताओ, जिनकी तुमने अल्लाह के साथ पूजा की है, यदि तुम अपने दावे में सच्चे हो। या क्या तुम अल्लाह को ऐसे साझियों के बारे में बता रहे हो, जिन्हें वह धरती में नहीं जानता? या फिर तुम उसे एक ऊपरी बात बता रहे हो, जिसमें कोई सच्चाई नहीं है? बल्कि, शैतान ने इनकार करने वालों की नज़र में उनके छल को सुंदर बना दिया है, जिसके कारण वे अल्लाह का इनकार कर बैठे हैं और शैतान ने उन्हें हिदायत के रास्ते से हटा दिया है। और जिसे अल्लाह हिदायत के मार्ग से दूर कर दे, उसके लिए कोई मार्गदर्शक नहीं, जो उसका मार्गदर्शन कर सके।