तफ़सीर अल-मुख़्तसर
قَالَ هَلْ ءَامَنُكُمْ عَلَيْهِ إِلَّا كَمَآ أَمِنتُكُمْ عَلَىٰٓ أَخِيهِ مِن قَبْلُ ۖ فَٱللَّهُ خَيْرٌ حَـٰفِظًا ۖ وَهُوَ أَرْحَمُ ٱلرَّٰحِمِينَ ﴿٦٤﴾
उनके पिता ने उनसे कहा : क्या मैं उसके बारे में तुमपर उसी तरह विश्वास करूँ, जिस तरह इससे पहले उसके सगे भाई यूसुफ़ के बारे में तुमपर विश्वास किया था?! मैंने उसके बारे में तुमपर भरोसा किया था, और तुमने उसकी रक्षा करने की प्रतिज्ञा की थी। लेकिन तुमने जो प्रतिज्ञा की थी, उसे पूरा नहीं किया। इसलिए मुझे उसकी रक्षा करने की तुम्हारी प्रतिज्ञा का कोई भरोसा नहीं है, बल्कि मेरा भरोसा केवल अल्लाह पर है। क्योंकि वह जिसकी रक्षा करना चाहे, उसका सबसे अच्छा रक्षक है और जिसपर दया करना चाहे, उसपर सबसे अधिक दया करने वाला है।