तफ़सीर अल-मुख़्तसर
ذَٰلِكَ لِيَعْلَمَ أَنِّى لَمْ أَخُنْهُ بِٱلْغَيْبِ وَأَنَّ ٱللَّهَ لَا يَهْدِى كَيْدَ ٱلْخَآئِنِينَ ﴿٥٢﴾
अज़ीज़ की स्त्री ने कहा : मैंने इस बात का इक़रार कि मैंने ही उसे रिझाया था और वह सच्चा है, इस उद्देश्य से किया है कि यूसुफ़ जान ले कि मैंने उसकी अनुपस्थिति में उसपर आरोप नहीं मढ़ा है। क्योंकि जो कुछ अब तक हुआ, उससे मेरे लिए यह स्पष्ट हो गया कि कि अल्लाह झूठ बोलने वाले और फ़रेब करने वाले को सफल नहीं करता।