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يوسف

आयत 50

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَقَالَ ٱلْمَلِكُ ٱئْتُونِى بِهِۦ ۖ فَلَمَّا جَآءَهُ ٱلرَّسُولُ قَالَ ٱرْجِعْ إِلَىٰ رَبِّكَ فَسْـَٔلْهُ مَا بَالُ ٱلنِّسْوَةِ ٱلَّـٰتِى قَطَّعْنَ أَيْدِيَهُنَّ ۚ إِنَّ رَبِّى بِكَيْدِهِنَّ عَلِيمٌ ﴿٥٠﴾

जब राजा को पता चला कि यूसुफ़ ने उसके सपने का अर्थ बताया है, तो उसने अपने सहयोगियों से कहा : उसे जेल से बाहर निकालो और मेरे पास लाओ। लेकिन जब राजा का दूत यूसुफ़ के पास आया, तो उन्होंने उससे कहा : तुम अपने स्वामी राजा के पास वापस जाओ और उससे उन महिलाओं की कहानी के बारे में पूछो, जिन्होंने अपने हाथ घायल कर लिए थे, ताकि जेल से निकलने से पहले उनकी बेगुनाही स्पष्ट हो जाए। निःसंदेह, उन्होंने मुझे रिझाने का जो प्रयास किया था, उसे मेरा पालनहार जानता है। वह उससे छिपा नहीं है।