तफ़सीर अल-मुख़्तसर
وَإِن كَذَّبُوكَ فَقُل لِّى عَمَلِى وَلَكُمْ عَمَلُكُمْ ۖ أَنتُم بَرِيٓـُٔونَ مِمَّآ أَعْمَلُ وَأَنَا۠ بَرِىٓءٌ مِّمَّا تَعْمَلُونَ ﴿٤١﴾
यदि (ऐ रसूल!) आपकी क़ौम के लोग आपको झुठलाएँ, तो उनसे कह दें : मेरे लिए मेरे कर्म का सवाब है और मुझे ही अपने कर्म की ज़िम्मेदारी उठानी है और तुम्हारे लिए तुम्हारे कर्म का सवाब है और तुम्हें ही उसका दंड झेलना है। जो कुछ मैं कर रहा हूँ उसके दंड से तुम बरी हो और जो कुछ तुम कर रहे हो उसके दंड से मैं बरी हूँ।