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يونس

आयत 11

तफ़सीर अल-मुख़्तसर

وَلَوْ يُعَجِّلُ ٱللَّهُ لِلنَّاسِ ٱلشَّرَّ ٱسْتِعْجَالَهُم بِٱلْخَيْرِ لَقُضِىَ إِلَيْهِمْ أَجَلُهُمْ ۖ فَنَذَرُ ٱلَّذِينَ لَا يَرْجُونَ لِقَآءَنَا فِى طُغْيَـٰنِهِمْ يَعْمَهُونَ ﴿١١﴾

यदि पवित्र अल्लाह लोगों के क्रोधित होने पर ख़ुद अपने, अपने बच्चों और अपने धन पर बद-दुआ (शाप) को उसी तरह जल्दी क़बूल कर ले, जिस तरह उनकी भलाई की दुआओं को स्वीकार करता है - तो वे नष्ट हो जाएँ। लेकिन अल्लाह उन्हें ढील देता है। अतः वह उन लोगों को, जो उससे मिलने की प्रतीक्षा नहीं करते (क्योंकि उन्हें न किसी दंड का भय होता है और न सवाब की आशा होती है) हिसाब के दिन के बारे में भ्रमित, चकित और शंकित छोड़ देता है।