अज़ीज़ुल-हक़ उमरी — 592
87:11 और उससे दूर रहेगा, जो सबसे बड़ा अभागा है।
87:12 जो सबसे बड़ी आग में प्रवेश करेगा।
87:13 फिर वह उसमें न मरेगा, न जिएगा।[4]
87:14 निश्चय वह सफल हो गया, जो पाक हो गया।
87:15 तथा अपने पालनहार के नाम को याद किया और नमाज़ पढ़ी।[5]
87:16 बल्कि तुम सांसारिक जीवन को प्राथमिकता देते हो।
87:17 हालाँकि आख़िरत बहुत उत्तम और अधिक बाक़ी रहने वाली है।
87:18 निःसंदेह यह बात पहले सह़ीफ़ों (ग्रंथों) में है।
87:19 इबराहीम तथा मूसा के सह़ीफ़ों (ग्रंथों) में।[6]
88:1 क्या तेरे पास ढाँपने लेने वाली (क़ियामत) की ख़बर पहुँची?
88:2 उस दिन कई चेहरे अपमानित होंगे।
88:3 कठिन परिश्रम करने वाले, थक जाने वाले।
88:4 वे गर्म धधकती आग में प्रवेश करेंगे।
88:5 उन्हें खौलते सोते का जल पिलाया जाएगा।
88:6 उनके लिए कांटेदार झाड़ के सिवा कोई खाना नहीं होगा।
88:7 जो न मोटा करेगा और न भूख मिटाएगा।[1]
88:8 उस दिन कई चेहरे प्रफुल्लित होंगे।
88:9 अपने प्रयास पर प्रसन्न होंगे।
88:10 ऊँची जन्नत में होंगे।
88:11 उसमें कोई बेकार (अशिष्ट) बात नहीं सुनेंगे।
88:12 उसमें बहने वाले स्रोत (चश्मे) हैं।
88:13 उसमें ऊँचे-ऊँचे तख्त हैं।
88:14 और (पीने वालों के लिए तैयार) रखे हुए प्याले हैं।
88:15 और क्रम में लगे हुए गाव-तकिए हैं।
88:16 और बिछाए हुए क़ालीन हैं।[2]
88:17 क्या वे ऊँटों को नहीं देखते कि वे कैसे पैदा किए गए हैं?
88:18 और आकाश को (नहीं देखते) कि उसे कैसे ऊँचा किया गया?
88:19 और पर्वतों को (नहीं देखते) कि कैसे गाड़े गए हैं?
88:20 तथा धरती को (नहीं देखते) कि कैसे बिछाई गई है?[3]
88:21 अतः आप नसीहत करें, आप केवल नसीहत करने वाले हैं।
88:22 आप उनपर कोई दरोग़ा (नियंत्रक) नहीं हैं।