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अज़ीज़ुल-हक़ उमरी — 590

84:25 परंतु जो लोग ईमान लाए तथा उन्होंने सत्कर्म किए, उनके लिए कभी न समाप्त होने वाला बदला है।[4]

85:1 क़सम है बुर्जों वाले आकाश की!

85:2 और क़सम है उस दिन की, जिसका वादा किया गया है!

85:3 क़सम है गवाह की और उसकी, जिसके बारे में गवाही दी जाएगी!

85:4 खाई वालों का नाश हो गया![1]

85:5 जिसमें ईंधन से भरी आग थी।

85:6 जबकि वे उस (के किनारों) पर बैठे हुए थे।

85:7 और वे ईमान वालों के साथ जो कुछ कर रहे थे, उस पर गवाह थे।

85:8 और उन्हें ईमान वालों की केवल यह बात बुरी लगी कि वे उस अल्लाह पर ईमान रखते थे, जो प्रभुत्वशाली और हर प्रकार की प्रशंसा के योग्य है।

85:9 वह (अल्लाह) कि जिसके लिए आकाशों और धरती का राज्य है, और अल्लाह हर चीज़ से अवगत है।

85:10 निश्चय जिन लोगों ने ईमान वाले पुरुषों और ईमान वाली स्त्रियों को परीक्षण में डाला (सताया), फिर तौबा न की, तो उनके लिए जहन्नम की यातना है तथा उनके लिए जलाने वाली यातना है।

85:11 निःसंदेह जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे काम किए, उनके लिए ऐसे बाग़ हैं, जिनके नीचे नहरें बह रही हैं और यही बहुत बड़ी सफलता है।[2]

85:12 निःसंदेह तेरे पालनहार की पकड़ बड़ी सख्त है।

85:13 निःसंदेह वही पहली बार पैदा करता है और (वही) दूसरी बार पैदा करेगा।

85:14 और वह है जो अत्यंत क्षमा करने वाला, बहुत प्रेम करने वाला है।

85:15 वह अर्श (सिंहासन) का मालिक, बड़ा गौरवशाली है।

85:16 वह जो चाहता है, कर गुज़रने वाला है।[3]

85:17 (ऐ नबी!) क्या तुम्हें सेनाओं की ख़बर पहुँची है?

85:18 फ़िरऔन तथा समूद की?[4]

85:19 बल्कि वे लोग जिन्होंने कुफ़्र किया, झुठलाने में लगे हुए हैं।

85:20 और अल्लाह उनके पीछे से (उन्हें) घेरे हुए है।[5]

85:21 बल्कि वह गौरव वाला क़ुरआन है।

85:22 जो लौह़े मह़फ़ूज़ (सुरक्षित पट्टिका) में लिखा हुआ है।[6]