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अज़ीज़ुल-हक़ उमरी — 583

78:31 निःसंदेह (अल्लाह से) डरने वालों के लिए सफलता है।

78:32 बाग़ तथा अंगूर।

78:33 और समान उम्र वाली नवयुवतियाँ।

78:34 और छलकते हुए प्याले।

78:35 वे उसमें न तो कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न (एक दूसरे को) झुठलाना।

78:36 यह तुम्हारे पालनहार की ओर से बदले में ऐसा प्रदान है जो पर्याप्त होगा।

78:37 जो आकाशों और धरती तथा उनके बीच की हर चीज़ का पालनहार है, अत्यंत दयावान् है। उससे बात करने का उन्हें अधिकार नहीं होगा।

78:38 जिस दिन रूह़ (जिबरील) तथा फ़रिश्ते पंक्तियों में खड़े होंगे, उससे केवल वही बात कर सकेगा जिसे रहमान (अल्लाह) आज्ञा देगा और वह ठीक बात कहेगा।

78:39 यही (वह) दिन है जो सत्य है। अतः जो चाहे अपने पालनहार की ओर लौटने की जगह (ठिकाना) बना ले।[5]

78:40 निःसंदेह हमने तुम्हें एक निकट ही आने वाली यातना से डरा दिया है, जिस दिन मनुष्य देख लेगा, जो कुछ उसके दोनों हाथों ने आगे भेजा है, और काफिर कहेगा : ऐ काश कि मैं मिट्टी होता![6]

79:1 क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो डूबकर सख़्ती से (प्राण) खींचने वाले हैं!

79:2 और क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो आसानी से (प्राण) निकालने वाले हैं!

79:3 और क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो तेज़ी से तैरने वाले हैं!

79:4 फिर क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो दौड़कर आगे बढ़ने वाले हैं!

79:5 फिर क़सम है उन फ़रिश्तों की, जो आदेश को क्रियान्वित करने वाले हैं![1]

79:6 जिस दिन काँपने वाली (अर्थात् धरती) काँप उठेगी।

79:7 उसके पीछे आएगी पीछे आने वाली।

79:8 उस दिन कई दिल धड़कने वाले होंगे।

79:9 उनकी आँखें झुकी हुई होंगी।

79:10 वे कहते हैं : क्या हम निश्चय पहली स्थिति में लौटाए जाने वाले हैं?

79:11 क्या जब हम सड़ी-गली हड्डियाँ हो जाएँगे?

79:12 उन्होंने कहा : यह तो उस समय घाटे वाला लौटना होगा।

79:13 वह तो केवल एक डाँट होगी।

79:14 फिर एकाएक वे (जीवित होकर) धरती के ऊपर होंगे।

79:15 (ऐ नबी!) क्या आपके पास मूसा की बात पहुँची है?[2]

79:16 जब उसके पालनहार ने उसे पवित्र घाटी 'तुवा' में पुकारा।