अज़ीज़ुल-हक़ उमरी — 571
71:11 वह तुम पर मूसलाधार बारिश बरसाएगा।
71:12 और वह तुम्हें धन और बच्चों में वृद्धि प्रदान करेगा तथा तुम्हारे लिए बाग़ बना देगा और तुम्हारे लिए नहरें निकाल देगा।
71:13 तुम्हें क्या हो गया है कि तुम अल्लाह की महिमा से नहीं डरते?
71:14 हालाँकि उसने तुम्हें विभिन्न चरणों[3] में पैदा किया है।
71:15 क्या तुमने देखा नहीं कि अल्लाह ने किस तरह ऊपर-तले सात आकाश बनाए?
71:16 और उसने उनमें चाँद को प्रकाश बनाया और सूर्य को दीपक बनाया।
71:17 और अल्लाह ही ने तुम्हें धरती[4] से (विशेष ढंग से) उगाया।
71:18 फिर वह तुम्हें उसी में वापस ले जाएगा और तुम्हें (उसी से) निकालेगा।
71:19 और अल्लाह ने तुम्हारे लिए धरती को बिछौना बनाया।
71:20 ताकि तुम उसके विस्तृत मार्गों पर चलो।
71:21 नूह ने कहा : ऐ मेरे रब! निःसंदेह उन्होंने मेरी अवज्ञा की और उसका[5] अनुसरण किया, जिसके धन और संतान ने उसकी क्षति ही को बढ़ाया।
71:22 और उन्होंने बहुत बड़ी चाल चली।
71:23 और उन्होंने कहा : तुम अपने पूज्यों को कदापि न छोड़ना, और न कभी वद्द को छोड़ना, और न सुवाअ को और न यग़ूस और यऊक़ तथा नस्र[6] को।
71:24 और निश्चय उन्होंने बहुत-से लोगों को पथभ्रष्ट कर दिया। तथा तू अत्याचारियों की पथभ्रष्टता[7] ही में वृद्धि कर।
71:25 वे अपने पापों के कारण डुबो[8] दिए गए, फिर जहन्नम में डाल दिए गए, तो उन्होंने अल्लाह के सिवा अपने लिए कोई मदद करने वाले नहीं पाए।
71:26 तथा नूह़ ने कहा : ऐ मेरे रब! धरती पर (इन) काफ़िरों में से कोई रहने वाला न छोड़।
71:27 निःसंदेह यदि तू उन्हें छोड़े रखेगा, तो वे तेरे बंदों को पथभ्रष्ट करेंगे और दुराचारी एवं सख़्त काफ़िर ही को जन्म देंगे।
71:28 ऐ मेरे पालनहार! मुझे क्षमा करे दे, तथा मेरे माता-पिता को, और (हर) उस व्यक्ति को जो मेरे घर में मोमिन बन कर प्रवेश करे, तथा ईमान वाले पुरुषों और ईमान वाली स्त्रियों को। और अत्याचारियों को विनाश के सिवाय किसी चीज़ में न बढ़ा।