अज़ीज़ुल-हक़ उमरी — 565
68:17 निःसंदेह हमने उन्हें परीक्षा में डाला[5] है, जिस प्रकार बाग़ वालों को परीक्षा में डाला था, जब उन्होंने क़सम खाई कि भोर होते ही उसके फल अवश्य तोड़ लेंगे।
68:18 और वे 'इन शा अल्लाह' नहीं कह रहे थे।
68:19 तो आपके पालनहार की ओर से उस (बाग़) पर एक यातना फिर गई, जबकि वे सोए हुए थे।
68:20 तो वह अंधेरी रात जैसा (काला) हो गया।
68:21 फिर उन्होंने भोर होते ही एक-दूसरे को पुकारा :
68:22 कि अपने खेत पर सवेरे ही जा पहुँचो, यदि तुम फल तोड़ने वाले हो।
68:23 चुनाँचे वे आपस में चुपके-चुपके बातें करते हुए चल दिए।
68:24 कि आज उस (बाग़) में तुम्हारे पास कोई निर्धन[6] हरगिज़ न आने पाए।
68:25 और वे सुबह-सुबह (यह सोचकर) निकले कि वे (निर्धनों को) रोकने में सक्षम हैं।
68:26 फिर जब उन्होंने उसे देखा, तो कहा : निःसंदेह हम निश्चय रास्ता भूल गए हैं।
68:27 बल्कि हम वंचित[7] कर दिए गए हैं।
68:28 उनमें से बेहतर ने कहा : क्या मैंने तुमसे नहीं कहा था कि तुम (अल्लाह की) पवित्रता का वर्णन क्यों नहीं करते?
68:29 उन्होंने कहा : हमारा रब पवित्र है। निःसंदेह हम ही अत्याचारी थे।
68:30 फिर वे आपस में एक दूसरे को दोष देने लगे।
68:31 उन्होंने कहा : हाय हमारा विनाश! निश्चय हम ही सीमा का उल्लंघन करने वाले थे।
68:32 आशा है कि हमारा पालनहार हमें बदले में इस (बाग़) से बेहतर प्रदान करेगा। निश्चय हम अपने पालनहार ही की ओर इच्छा रखने वाले हैं।
68:33 इसी तरह होती है यातना, और आख़िरत की यातना तो इससे भी बड़ी है। काश वे जानते होते!
68:34 निःसंदेह डरने वालों के लिए उनके पालनहार के पास नेमत के बाग़ हैं।
68:35 तो क्या हम आज्ञाकारियों[8] को अपराध करने वालों की तरह कर देंगे?
68:36 तुम्हें क्या हुआ, तुम कैसे फ़ैसले करते हो?
68:37 क्या तुम्हारे पास कोई पुस्तक है, जिसमें तुम पढ़ते हो?
68:38 (कि) निश्चय तुम्हारे लिए आख़िरत में वही होगा, जो तुम पसंद करोगे?
68:39 या तुम्हारे लिए हमारे ऊपर क़समें हैं, जो क़ियामत के दिन तक बाक़ी रहने वाली हैं कि तुम्हारे लिए निश्चय वही होगा, जो तुम निर्णय करोगे?
68:40 आप उनसे पूछिए कि उनमें से कौन इसकी ज़मानत लेता है?
68:41 क्या उनके कोई साझी हैं? फिर तो वे अपने साझियों को ले आएँ[9], यदि वे सच्चे हैं।
68:42 जिस दिन पिंडली खोल दी जाएगी और वे सजदा करने के लिए बुलाए जाएँगे, तो वे सजदा नहीं कर सकेंगे।[10]