अज़ीज़ुल-हक़ उमरी — 564
67:27 फिर जब वे उसे निकट देखेंगे, तो उन लोगों के चेहरे बिगड़ जाएँगे जिन्होंने इनकार किया और कहा जाएगा : यही है वह जो तुम माँगा करते थे।
67:28 आप कह दें : भला बताओ तो सही, यदि अल्लाह मुझे और उनको, जो मेरे साथ हैं, विनष्ट कर दे या हम पर दया करे, तो काफ़िरों को दर्दनाक यातना[10] से कौन शरण देगा?
67:29 आप कह दें : वही अत्यंत दयावान् है। हम उसपर ईमान लाए तथा हमने उसी पर भरोसा किया। तो शीघ्र ही तुम जान लोगे कि वह कौन है जो खुली गुमराही में है।
67:30 आप कह दें : भला बताओ तो सही, यदि तुम्हारा पानी गहराई में चला जाए, तो कौन है जो तुम्हारे पास बहता हुआ पानी लाएगा?
68:1 नून। क़सम है क़लम की तथा उसकी[1] जो वे लिखते हैं।
68:2 आप, अपने रब के अनुग्रह से हरगिज़ दीवाना नहीं हैं।
68:3 तथा निःसंदेह आपके लिए निश्चय ऐसा प्रतिफल है जो निर्बाध है।
68:4 तथा निःसंदेह निश्चय आप एक महान चरित्र पर हैं।
68:5 अतः शीघ्र ही आप देख लेंगे तथा वे भी देख लेंगे।
68:6 कि तुममें से कौन पागलपन से ग्रसित है।
68:7 निःसंदेह आपका पालनहार ही उसे अधिक जानता है, जो उसकी राह से भटक गया तथा वही अधिक जानता है उन्हें, जो सीधे मार्ग पर हैं।
68:8 अतः आप झुठलाने वालों की बात न मानें।
68:9 वे चाहते हैं काश! आप नरमी करें, तो वे भी नरमी[2] करें।
68:10 और आप किसी बहुत क़समें खाने वाले, हीन व्यक्ति की बात न मानें।[3]
68:11 जो बहुत ग़ीबत करने वाला, चुग़ली में बहुत दौड़-धूप करने वाला है।
68:12 भलाई को बहुत रोकने वाला, हद से बढ़ने वाला, घोर पापी है।
68:13 क्रूर है, इसके उपरांत हरामज़ादा (वर्णसंकर) है।
68:14 इस कारण कि वह धन और बेटों वाला है।
68:15 जब उसके सामने हमारी आयतें पढ़ी जाती हैं, तो कहता है : यह पहले लोगों की (कल्पित) कहानियाँ हैं।
68:16 शीघ्र ही हम उसकी थूथन[4] पर दाग़ लगाएँगे।