अज़ीज़ुल-हक़ उमरी — 528
53:45 और यह कि निःसंदेह उसी ने दो प्रकार : नर और मादा पैदा किए।
53:46 एक बूँद से, जब वह टपकाई जाती है।
53:47 और यह कि निःसंदेह उसी के ज़िम्मे दूसरी बार[12] पैदा करना है।
53:48 और यह कि निःसंदेह उसी ने धनी बनाया और कोष प्रदान किया।
53:49 और यह कि निःसंदेह वही ''शे'रा'' [13] का रब है।
53:50 और यह कि निःसंदेह उसी ने प्रथम 'आद' [14] को विनष्ट किया।
53:51 तथा समूद को, फिर (किसी को) बाक़ी न छोड़ा।
53:52 तथा इनसे पहले नूह़ की जाति को। निःसंदेह वे बहुत ही ज़ालिम और बड़े ही सरकश थे।
53:53 और उलट जाने वाली बस्ती[15] को उसने उठाकर धरती पर दे मारा।
53:54 तो ढाँप दिया[16] उसे जिस चीज़ से ढाँपा।
53:55 तो (ऐ इनसान!) तू अपने पालनहार की ने'मतों में से किस-किस में संदेह करेगा?
53:56 यह[17] पहले डराने वालों में से एक डराने वाला है।
53:57 निकट आने वाली निकट आ गई।
53:58 जिसे अल्लाह के सिवा कोई हटाने वाला नहीं।
53:59 तो क्या तुम इस बात पर आश्चर्य करते हो?
53:60 तथा हँसते हो और रोते नहीं हो?
53:61 तथा तुम ग़ाफ़िल हो!
53:62 अतः अल्लाह को सजदा करो और उसी की इबादत[18] करो।
54:1 क़ियामत बहुत निकट आ गई[1] और चाँद फट गया।
54:2 और यदि वे कोई निशानी देखते हैं, तो मुँह फेर लेते हैं और कहते हैं कि (यह) एक जादू है जो समाप्त हो जाने वाला है।
54:3 उन्होंने झुठलाया और अपनी इच्छाओं का पालन किया और प्रत्येक कार्य का एक निश्चित समय है।
54:4 और निःसंदेह उनके पास ऐसी सूचनाएँ आ चुकी हैं, जिनमें डाँटडपट है।
54:5 पूर्णतया हिकमत है, फिर भी डरानेवाली चीज़ें काम नहीं आतीं।
54:6 अतः आप उनसे मुँह फेर लें, जिस दिन पुकारने वाला एक अप्रिय चीज़[2] की ओर पुकारेगा।