अज़ीज़ुल-हक़ उमरी — 522
51:31 उसने कहा : ऐ भेजे हुए (दूतो!) तुम्हारा अभियान क्या है?
51:32 उन्होंने कहा : निःसंदेह हम कुछ अपराधी लोगों की ओर भेजे गए हैं।
51:33 ताकि हम उनपर मिट्टी के पत्थर बरसाएँ।
51:34 जो तुम्हारे पालनहार के पास से सीमा से आगे बढ़ने वालों के लिए चिह्नित[9] हैं।
51:35 फिर हमने उस (बस्ती) में जो भी ईमानवाले थे उन्हें निकाल लिया।
51:36 तो हमने उसमें मुसलमानों के एक घर[10] के सिवा कोई और नहीं पाया।
51:37 तथा हमने उसमें उन लोगों के लिए एक निशानी छोड़ दी, जो दुःखदायी यातना से डरते हैं।
51:38 तथा मूसा (की कहानी) में (भी एक निशानी है), जब हमने उसे फ़िरऔन की ओर एक स्पष्ट प्रमाण देकर भेजा।
51:39 तो उसने अपनी शक्ति के कारण मुँह फेर लिया और उसने कहा : यह जादूगर है, या पागल।
51:40 अंततः हमने उसे और उसकी सेनाओं को पकड़ लिया, फिर उन्हें समुद्र में फेंक दिया, जबकि वह एक निंदनीय काम करने वाला था।
51:41 तथा आद में, जब हमने उनपर बाँझ[11] हवा भेजी दी।
51:42 वह जिस चीज़ पर से भी गुज़रती, उसे सड़ी हुई हड्डी की तरह कर देती थी।
51:43 तथा समूद में, जब उनसे कहा गया कि एक समय तक के लिए लाभ उठा लो।
51:44 फिर उन्होंने अपने पालनहार के आदेश की अवज्ञा की, तो उन्हें कड़क ने पकड़ लिया और वे देख रहे थे।
51:45 फिर उनमें न तो खड़े होने की शक्ति थी और न ही वे प्रतिकार करने वाले थे।
51:46 तथा इससे पहले नूह़ की जाति को (विनष्ट कर दिया)। निश्चय ही वे अवज्ञाकारी लोग थे।[12]
51:47 तथा आकाश को हमने शक्ति के साथ बनाया और निःसंदेह हम निश्चय विस्तार करने वाले हैं।
51:48 तथा धरती को हमने बिछा दिया, तो हम क्या ही खूब बिछाने वाले हैं।
51:49 तथा हमने हर चीज़ के दो प्रकार बनाए, ताकि तुम नसीहत ग्रहण करो।
51:50 अतः अल्लाह की ओर दौड़ो। निश्चय ही मैं तुम्हारे लिए उसकी ओर से स्पष्ट सचेतकर्ता हूँ।
51:51 और अल्लाह के साथ कोई दूसरा पूज्य मत बनाओ। निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए उसकी ओर से खुला डराने वाला हूँ।