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अज़ीज़ुल-हक़ उमरी — 498

44:40 निश्चय फ़ैसले[7] का दिन उन सब का नियत समय है।

44:41 जिस दिन कोई साथी किसी साथी के कुछ काम न आएगा और न उनकी सहायता की जाएगी।

44:42 किंतु जिसपर अल्लाह ने दया की, निःसंदेह वही सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान है।

44:43 निःसंदेह ज़क़्क़ूम (थूहड़) का वृक्ष।

44:44 पापी का भोजन है।

44:45 पिघले हुए ताँबे (या तलछट) की तरह, पेटों में खौलता है।

44:46 गर्म पानी के खौलने की तरह।

44:47 इसे पकड़ो, फिर इसे धधकती आग के बीच तक घसीटकर ले जाओ।

44:48 फिर खौलते हुए पानी की कुछ यातना उसके सिर पर उँडेल दो।[8]

44:49 चख, निःसंदेह तू ही वह व्यक्ति है जो बड़ा बलशाली और सम्माननीय है।

44:50 निःसंदे यह वही है जिसके बारे में तुम संदेह करते थे।

44:51 निःसंदेह परहेज़गार लोग शांति एवं सुरक्षा वाली जगह में होंगे।

44:52 बाग़ों तथा जल स्रोतों में।

44:53 वे बारीक और गाढ़े रेशम के वस्त्र पहनेंगे, आमने-सामने बैठे होंगे।

44:54 ऐसा ही होगा और हम उनका विवाह गोरे बदन, काली आँखों वाली औरतों से कर देंगे, जो बड़ी-बड़ी आँखों वाली होंगी।

44:55 वे उसमें निश्चिंत होकर हर प्रकार के फल मंगवाएँगे।

44:56 वे उसमें मृत्यु[9] का स्वाद नहीं चखेंगे, परंतु वह मृत्यु जो पहली थी, और वह (अल्लाह) उन्हें दहकती हुई आग के अज़ाब से बचा लेगा।

44:57 आपके पालनहार की ओर से अनुग्रह के कारण। यही बहुत बड़ी सफलता है।

44:58 सो तथ्य यही है कि हमने इसे आपकी भाषा में आसान कर दिया है, ताकि वे नसीहत ग्रहण करें।

44:59 अतः आप प्रतीक्षा करें,[10] निःसंदेह वे भी प्रतीक्षा करने वाले हैं।