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अज़ीज़ुल-हक़ उमरी — 497

44:19 तथा यह कि अल्लाह के मुक़ाबले में सरकशी न करो, निःसंदेह मैं तुम्हारे पास स्पष्ट प्रमाण लाने वाला हूँ।

44:20 तथा निःसंदेह मैंने अपने पालनहार तथा तुम्हारे पालनहार की इससे शरण ली है कि तुम मुझपर पथराव कर मेरी जान ले लो।

44:21 और अगर तुम मेरी बात नहीं मानते, तो मुझसे दूर रहो।

44:22 अंततः उसने अपने पालनहार को पुकारा कि निःसंदेह ये अपराधी लोग हैं।

44:23 अतः तुम मेरे बंदों को लेकर रातों-रात चले जाओ। निःसंदेह तुम्हारा पीछा किया जाएगा।

44:24 तथा सागर को अपनी दशा पर ठहरा हुआ छोड़ दे। निःसंदेह वे एक ऐसी सेना हैं, जो डुबोए जाने वाले हैं।

44:25 वे कितने ही बाग़ और जल स्रोत छोड़ गए।

44:26 तथा खेतियाँ और बढ़िया स्थान।

44:27 तथा सुख-सामग्री, जिनमें वे आनंद ले रहे थे।

44:28 ऐसा ही हुआ और हमने उनका उत्तराधिकारी दूसरे[4] लोगों को बना दिया।

44:29 फिर न उनपर आकाश और धरती रोए और न वे मोहलत पाने वाले हुए।

44:30 तथा निःसंदेह हमने इसराईल की संतान को अपमानकारी यातना से बचा लिया।

44:31 फ़िरऔन से। निःसंदेह वह हद से बढ़ने वालों में से एक सरकश व्यक्ति था।

44:32 तथा निःसंदेह हमने उन्हें ज्ञान के आधार पर संसार वासियों पर चुन लिया।

44:33 तथा हमने उन्हें ऐसी निशानियाँ प्रदान कीं, जिनमें खुली परीछा थी।

44:34 निःसंदेह ये[5] लोग निश्चय कहते हैं।

44:35 कि हमारी इस पहली मृत्यु के सिवा कोई (मृत्यु) नहीं, और न हम कभी दोबारा उठाए जाएँगे।

44:36 तो तुम हमारे बाप-दादा को ले आओ, यदि तुम सच्चे हो?

44:37 क्या ये लोग बेहतर हैं, अथवा तुब्बा' की जाति[6] तथा वे लोग जो उनसे पूर्व थे? हमने उन्हें विनष्ट कर दिया। निःसंदेह वे अपराधी थे।

44:38 और हमने आकाशों और धरती को और जो कुछ उनके बीच है, खेलते हुए नहीं बनाया है।

44:39 हमने उन दोनों को सत्य ही के साथ पैदा किया है, किंतु उनमें से अधिकतर लोग नहीं जानते।