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अज़ीज़ुल-हक़ उमरी — 457

38:62 तथा वे कहेंगे : हमें क्या हुआ कि हम उन लोगों को नहीं देख रहे हैं, जिनकी गणना हम बुरे लोगों में किया करते थे?[15]

38:63 क्या हमने उन्हें मज़ाक़ बनाए रखा, या हमारी आँखें उनसे फिर गई हैं?

38:64 निःसंदेह यह जहन्नमियों का आपस में झगड़ना निश्चय सत्य है।

38:65 (ऐ नबी!) आप कह दें : मैं तो मात्र एक डराने वाला[16] हूँ, तथा अल्लाह के सिवा कोई (सच्चा) पूज्य नहीं, जो एक है, परम प्रभुत्वशाली है।

38:66 जो आकाशों का तथा धरती का पालनहार है और उन चीज़ों का जो उन दोनों के बीच है, सब पर प्रभुत्वशाली, अत्यंत क्षमाशील है।

38:67 आप कह दें कि वह[17] एक बहुत बड़ी सूचना है।

38:68 जिससे तुम मुँह फेरने वाले हो।

38:69 मुझे उच्च सभा (मलए आ'ला) का कभी कुछ ज्ञान नहीं, जब वे वाद-विवाद करते हैं।

38:70 मेरी ओर तो मात्र इसलिए वह़्य (प्रकाशना) की जाती है कि मैं खुला सचेत करने वाला हूँ।

38:71 जब आपके पालनहार ने फ़रिश्तों से कहा : निःसंदेह मैं मिट्टी से एक मनुष्य पैदा करने वाला हूँ।

38:72 तो जब मैं उसे पूरा बना चुकूँ और उसमें अपनी आत्मा फूँक दूँ, तो तुम उसके सामने सजदा करते हुए गिर जाओ।

38:73 तो सब के सब फ़रिश्तों ने सजदा किया।

38:74 सिवाय इबलीस के। उसने अभिमान किया और काफ़िरों में से हो गया।

38:75 (अल्लाह ने) कहा : ऐ इबलीस! तूझे किस चीज़ ने रोका कि तू उसके लिए सजदा करे जिसे मैंने अपने दोनों हाथों से बनाया? क्या तू बड़ा बन गया, या तू था ही ऊँचे लोगों में से?

38:76 उसने कहा : मैं उससे बेहतर हूँ। तूने मुझे आग से पैदा किया और उसे मिट्टी से पैदा किया।

38:77 (अल्लाह ने) कहा : फिर तू यहाँ से निकल जा। निःसंदेह तू धुत्कारा हुआ है।

38:78 और निःसंदेह तुझपर बदले (क़ियामत) के दिन तक मेरी धिक्कार है।

38:79 उस (इबलीस) ने कहा : ऐ मेरे पालनहार! फिर मुझे उस दिन तक के लिए अवसर दे, जिसमें लोग पुनः जीवित किए जाएँगे।

38:80 (अल्लाह ने) कहा : निःसंदेह तू मोहलत दिए गए लोगों में से है।

38:81 निर्धारित समय के दिन तक।

38:82 उसने कहा : तो तेरे गौरव की क़सम! मैं अवश्य उन सबको गुमराह कर दूँगा।

38:83 सिवाय उनमें से तेरे उन बंदों के, जो चुने हुए हैं।