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अज़ीज़ुल-हक़ उमरी — 447

37:25 तुम्हें क्या हुआ कि तुम एक-दूसरे की सहायता नहीं करते?

37:26 बल्कि, आज वे सर्वथा आज्ञाकारी हैं।

37:27 और वे एक-दूसरे की ओर रुख़ करके परस्पर प्रश्न करेंगे।[6]

37:28 वे कहेंगे : निःसंदेह तुम हमारे पास दाहिने[7] से आया करते थे।

37:29 वे[8] कहेंगे : बल्कि तुम (स्वयं) ईमान वाले न थे।

37:30 तथा हमारा तुमपर कोई ज़ोर[9] न था, बल्कि तुम (स्वंय) हद से बढ़ने वाले लोग थे।

37:31 तो हमपर हमारे पालनहार का कथन सिद्ध हो गया। निःसंदेह हम निश्चय (यातना) चखने वाले हैं।

37:32 तो हमने तुम्हें गुमराह किया। निःसंदेह हम स्वयं गुमराह थे।

37:33 तो निश्चय ही वे उस दिन यातना में सहभागी होंगे।

37:34 निःसंदेह हम अपराधियों के साथ ऐसा ही किया करते हैं।

37:35 निःसंदेह वे ऐसे लोग थे कि जब उनसे कहा जाता कि अल्लाह के सिवा कोई पूज्य (इबादत के योग्य) नहीं, तो वे अभिमान करते थे।

37:36 तथा कहते थे : क्या सचमुच हम अपने पूज्यों को एक दीवाने कवि के कारण छोड़ देने वाले हैं?

37:37 बल्कि वह सत्य लेकर आए हैं तथा उन्होंने सभी रसूलों की पुष्टि की है।

37:38 निःसंदेह तुम निश्चय दुःखदायी यातना चखने वाले हो।

37:39 तथा तुम्हें केवल उसी का बदला दिया जाएगा, जो तुम किया करते थे।

37:40 परंतु अल्लाह के ख़ालिस (विशुद्ध) किए हुए बंदे।

37:41 यही लोग हैं, जिनके लिए निर्धारित रोज़ी है।

37:42 प्रत्येक प्रकार के फल। तथा वे सम्मानित किए गए हैं।

37:43 नेमत के बाग़ों में।

37:44 तख़्तों पर आमने-सामने बैठे होंगे।

37:45 उनपर प्रवाहित शराब के प्याले फिराए जाएँगे।

37:46 जो सफ़ेद होगी, पीने वालों के लिए स्वादिष्ट होगी।

37:47 न उसमें कोई सिरदर्द होगा, और न वे उससे मदहोश होंगे।

37:48 तथा उनके पास दृष्टि नीची रखने वाली, बड़ी आँखों वाली स्त्रियाँ होंगी।

37:49 मानो वे छिपाकर रखे हुए अंडे हों।[10]

37:50 फिर वे एक-दूसरे के सम्मुख होकर आपस में प्रश्न करेंगे।

37:51 उनमें से एक कहने वाला कहेगा : मेरा एक साथी था।