अज़ीज़ुल-हक़ उमरी — 375
26:184 और उससे डरो, जिसने तुम्हें तथा पहले लोगों को पैदा किया है।
26:185 उन्होंने कहा : निःसंदेह तू तो उन लोगों में से है जिनपर ताक़तवर जादू किया गया है।
26:186 और तू तो बस हमारे ही जैसा एक मनुष्य[30] है और निःसंदेह हम तो तुझे झूठों में से समझते हैं।
26:187 तो हम पर आसमान से कुछ टुकड़े गिरा दे, यदि तू सच्चों में से है।
26:188 उसने कहा : मेरा पालनहार अधिक जानने वाला है जो कुछ तुम कर रहे हो।
26:189 चुनाँचे उन्होंने उसे झुठला दिया। तो उन्हें छाया[31] के दिन की यातना ने पकड़ लिया। निश्चय वह एक बड़े दिन की यातना थी।
26:190 निःसंदेह इसमें निश्चय एक बड़ी निशानी है। और उनमें से अधिकतर ईमानवाले नहीं थे।
26:191 और निःसंदेह आपका पालनहार, निश्चय वही सबपर प्रभुत्वशाली, अत्यंत दयावान् है।
26:192 तथा निःसंदेह, यह (क़ुरआन) निश्चय सारे संसारों के पालनहार का उतारा हुआ है।
26:193 इसे रूह़ुल-अमीन[32] (अत्यंत विश्वसनीय फ़रिश्ता) लेकर उतरा है।
26:194 आपके दिल पर, ताकि आप सावधान करने वालों में से हो जाएँ।
26:195 स्पष्ट अरबी भाषा में।
26:196 तथा निःसंदेह यह निश्चित रूप से पहले लोगों की पुस्तकों में मौजूद है।[33]
26:197 क्या उनके लिए यह एक निशानी न थी है कि इसे बनी इसराईल के विद्वान[34] जानते हैं।
26:198 और यदि हम इसे ग़ैर-अरब[35] लोगों में से किसी पर उतार देते।
26:199 फिर वह इसे उनके सामने पढ़ता, तो भी वे उसपर ईमान लाने वाले न होते।[36]
26:200 इसी प्रकार हमने इसे अपराधियों के हृदयों में प्रवेश कर दिया।
26:201 वे उसपर ईमान नहीं लाएँगे, यहाँ तक कि वे दर्दनाक यातना देख लें।
26:202 तो वह उनपर अचानक आ पड़े और वे सोचते भी न हों।
26:203 फिर वे कहें : क्या हम मोहलत दिए जाने वाले हैं
26:204 तो क्या वे हमारी यातना के लिए जल्दी मचा रहे हैं?
26:205 तो क्या आपने विचार किया यदि हम इन्हें कुछ वर्षों तक लाभ दें।
26:206 फिर उनपर वह (यातना) आ जाए, जिसका उनसे वादा किया जाता था।