>

अज़ीज़ुल-हक़ उमरी — 295

18:16 और जब तुमने उनसे तथा अल्लाह के अतिरिक्त उनके पूज्यों से किनारा कर लिया, तो अब गुफा में शरण लो। तुम्हारा पालनहार तुम्हारे लिए अपनी कुछ दया खोल देगा, तथा तुम्हारे लिए तुम्हारे काम में कोई आसानी पैदा कर देगा।

18:17 और तुम सूर्य को देखोगे, जब वह निकलता है, तो उनकी गुफा से दायीं ओर झुक (हट) जाता है और जब डूबता है, तो उनसे बायीं ओर कतरा जाता है और वे उस (गुफा) के एक विस्तृत स्थान में हैं। यह अल्लाह की निशानियों में से है। और जिसे अल्लाह मार्ग दिखा दे, वही मार्ग पाने वाला है और जिसे राह से हटा दे, तो तुम उसके लिए हरगिज़ कोई मार्ग दर्शाने वाला सहायक नहीं पाओगे।

18:18 और तुम[5] उन्हें समझते कि जाग रहे हैं, जबकि वे सोए हुए थे। और हम उन्हें दायें तथा बायें फेरते रहे। और उनका कुत्ता गुफा की चौखट पर अपनी दोनों बाहें फैलाए हुए था। यदि तुम झाँककर देख लेते, तो पीठ फेरकर भाग जाते और उनसे भयभीत हो जाते।

18:19 और इसी प्रकार, हमने उन्हें जगा दिया, ताकि वे आपस में एक-दूसरे से पूछें। उनमें से एक कहने वाले ने कहा : तुम कितना समय ठहरे? उन्होंने कहा : हम एक दिन या दिन का कुछ हिस्सा ठहरे। (फिर) उन्होंने कहा : तुम्हारा पालनहार अधिक जानता है कि तुम कितना (समय) ठहरे। (अब) अपने में से किसी को अपना यह चाँदी का सिक्का देकर नगर की ओर भेजो। फिर वह देखे कि किसके पास अधिक स्वच्छ (पवित्र) भोजन है, तो वह उसमें से तुम्हारे लिए कुछ खाना ले आए, तथा वह नरमी व सावधानी बरते और तुम्हारे बारे में किसी को बिल्कुल ख़बर न होने दे।

18:20 क्योंकि यदि वे तुम्हें जान जाएँगे, तो तुम्हें पथराव करके मार डालेंगे या तुम्हें अपने धर्म में लौटा लेंगे और उस समय तुम कभी सफल नहीं हो सकोगे।