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अज़ीज़ुल-हक़ उमरी — 264

15:32 अल्लाह ने पूछा : ऐ इबलीस! तुझे क्या हुआ कि तू सजदा करने वालों में शामिल नहीं हुआॽ

15:33 उसने कहा : मैं ऐसा नहीं कि एक मनुष्य को सजदा करूँ, जिसे तूने सड़े हुए गारे की खनखनाती मिट्टी से पैदा किया है।

15:34 अल्लाह ने कहा : फिर तू यहाँ से निकल जा। क्योंकि निश्चय तू धिक्कारा हुआ है।

15:35 और निःसंदेह तुझपर बदले (क़ियामत) के दिन तक धिक्कार है।

15:36 उस (इबलीस) ने कहा[8] : ऐ मेरे पालनहार! तो फिर मुझे उस दिन तक मोहलत दे, जब वे (पुनः जीवित कर) उठाए जाएँगे।

15:37 (अल्लाह ने) कहा : तू निःसंदेह मोहलत दिए गए लोगों में से है।

15:38 ज्ञात समय के दिन तक।

15:39 वह बोला : ऐ मेरे पालनहार! चूँकि तूने मुझे पथभ्रष्ट किया है, मैं अवश्य ही उनके लिए धरती में (पाप को) सुशोभित करूँगा और उन सभी को पथभ्रष्ट कर दूँगा।

15:40 सिवाय तेरे उनमें से चुने हुए बंदों के।

15:41 (अल्लाह ने) कहा : यह रास्ता है जो मुझ तक सीधा है।

15:42 निःसंदेह मेरे बंदों पर तेरा कोई वश नहीं[9], परंतु जो बहके हुए लोगों में से तेरे पीछे चले।

15:43 और निश्चय ही उन सब के वादा की जगह जहन्नम है।

15:44 उस (जहन्नम) के सात द्वार हैं। और प्रत्येक द्वार के लिए उन (इबलीस के अनुयायियों) का एक विभाजित भाग[10] है।

15:45 निःसंदेह आज्ञाकारी लोग जन्नतों तथा स्रोतों में होंगे।

15:46 (उनसे कहा जाएगा :) इसमें सलामती के साथ निर्भय होकर प्रवेश कर जाओ।

15:47 और हम निकाल देंगे उनके दिलों में जो कुछ द्वेष होगा। वे भाई-भाई होकर एक-दूसरे के आमने-सामने तख़्तों पर (बैठे) होंगे।

15:48 न उसमें उन्हें कोई थकान होगी और न वे वहाँ से निकाले जाएँगे।

15:49 (ऐ नबी!) आप मेरे बंदों को सूचित कर दें कि निःसंदेह मैं ही बड़ा क्षमाशील, अत्यंत दयावान्[11] हूँ।

15:50 और यह भी कि निःसंदेह मेरी यातना ही कष्टदायक यातना है।

15:51 और आप उन्हें इबराहीम (अलैहिस्सलाम) के अतिथियों के बारे में सूचित कर दें।